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"नियुक्ति पर उठते सवाल और मेरा सच – हिमांशु राणा"

मेरी नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी, जो कि 2011 में निकले विज्ञापन के आधार पर हुई थी।

उस समय मेरी मेरिट भी कम थी – मात्र 103 अंक थे, और मुझसे अधिक अंक पाने वाले कई उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह गए थे।

मैं यह कहना चाहता हूं कि मुझे किसी से जलन या ईर्ष्या नहीं है। यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जो टेट उत्तीर्ण नहीं है और जाकर मेरी नियुक्ति को चुनौती देना चाहता है, तो मैं उसका स्वागत करूंगा। यदि मेरी नियुक्ति को किसी वजह से रद्द भी कर दिया जाए, तो मैं उसके लिए आभारी रहूंगा।

मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि सच का साथ देना चाहिए, न कि स्वार्थ का। यदि मेरी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है तो उसे उजागर किया जाना चाहिए, चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो।

जहाँ तक प्रमोशन का सवाल है – मेरी नियुक्ति 2017 की है, तो मैं 2014, 2015 या 2016 के प्रमोशन को कैसे चुनौती दूं?

उस समय मैं सेवा में था ही नहीं।


हमेशा मैं कहता हूं – पढ़ाई और योग्यता केवल दिखावे की चीज नहीं है, उसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है।


मैं चाहता हूं कि आप सब अपने हित की रक्षा करने से पहले यह विचार करें कि समाज में न्याय और सत्य का स्थान क्या है। मैं अपनी तरफ से नियुक्ति बचाने के लिए कोई भी अधिवक्ता खड़ा नहीं करूंगा।


विरोधियों के दिमाग़ में बैठा हुआ



हिमांशु राणा

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