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अवमानना में फंसने लगे तो भर्ती ही कर दी निरस्त

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड के 107 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निरस्त होने के बाद हजारों अभ्यर्थी निराश हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विज्ञापन निरस्त करने का कारण बताया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की शैक्षिक अर्हता को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) अधिनियम 2014 के अनुसार संशोधित करते हुए अग्रेतर कार्यवाही का निर्णय लिया गया है। जबकि इस भर्ती का विज्ञापन 2022 में आया था और उससे आठ साल पहले एनसीटीई की गाइडलाइन जारी हो गई थी।


ऐसे में सवाल है कि विज्ञापन के समय ही संशोधन क्यों नहीं कर लिया गया। असल में विज्ञापन निरस्त करने का कारण कुछ और है। नवगठित आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड 2022 की भर्ती के लिए 23 मई 2025 को नए सिरे से विज्ञापन जारी करते हुए आवेदन मांगे थे। उसमें शर्त थी कि वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं जिनके पास विज्ञापन संख्या 51 के आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2022 तक एनसीईटी मानक के अनुरूप योग्यता थी। इस पर 31 अगस्त 2022 के बाद न्यूनतम अर्हता हासिल करने वाले रोशन कुमार पांडेय और 11 अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका कर दी थी।

इस पर हाईकोर्ट ने याचिका करने वाले 12 अभ्यर्थियों से आवेदन लेने के लिए आयोग को वेबसाइट खोलने के आदेश दिए थे। आयोग ने वेबसाइट नहीं खोली तो इन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका कर दी। मामला बिगड़ता देख आयोग ने अस्तित्व में आने के बाद जारी पहला विज्ञापन ही निरस्त कर दिया।

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