🕯️ *शिक्षक मनोज साहू जी को श्रद्धांजलि – आइए इस घटना से सबक लें*🕯️👇✍️
जनपद महोबा के _विद्वान, संवेदनशील और कर्मठ शिक्षक साथी_ *श्री मनोज साहू* जी ने अपने जीवन का दुःखद अंत स्वयं अपने हाथों से कर लिया। यह समाचार सुनकर प्रत्येक शिक्षक, प्रत्येक परिवार और पूरा समाज स्तब्ध है।😥
_परंतु साथियों… एक प्रश्न हर किसी के मन में गूंज रहा है—_
👉 *क्या यह कदम उचित था?*🤔
_शिक्षक केवल अपने लिए नहीं जीता।_
_वह परिवार के लिए जीता है, अपनी पत्नी, अपने छोटे बच्चों, अपनी बहन और वृद्ध माता-पिता की उम्मीदों के लिए जीता है।_
वह समाज के लिए जीता है, उस हर बच्चे के लिए जीता है जिसे उसने ज्ञान का दीप जलाकर आगे बढ़ाना है।
इसलिए, जब कोई शिक्षक इस प्रकार अपने जीवन की डोर स्वयं तोड़ देता है, तो वह केवल एक जीवन नहीं खोता…
वह अपने पीछे अधूरी जिम्मेदारियों का पहाड़ छोड़ जाता है।
वह अपने परिवार के सपनों को चूर कर देता है।
वह अपने साथियों का हौसला कमजोर कर देता है।
*सच कहें तो यह कदम कायरता का प्रतीक है।*
शिक्षक वह है जो बच्चों को हर संकट में संघर्ष करना सिखाता है।
_तो फिर वह स्वयं क्यों हार मान ले?_
साथियों, हम जानते हैं—
सरकारी नीतियाँ, TET की अनिवार्यता, प्रमोशन की दुविधाएँ, असुरक्षा की भावना… यह सब बहुत भारी पड़ सकता है।
लेकिन, यही वह समय है जब हमें एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए।
👉 *जो साथी TET पास कर चुके हैं, उनसे विनम्र निवेदन है कि कभी अपने वरिष्ठ या संघर्षरत साथियों का मजाक न उड़ाएँ।*🙏
क्योंकि समय का चक्र हर किसी की परख करता है। आज किसी और पर विपत्ति है, कल शायद हम पर हो।
और जो साथी मानसिक रूप से दबाव में हैं, कृपया याद रखें—
सोशल मीडिया, मित्र, संगठन और साथी हमेशा आपके साथ खड़े हैं।
अपने मन की पीड़ा को कहने में हिचकिचाएँ नहीं।
*कभी भी ऐसा कदम न उठाएँ जिससे अपनों की आंखों से आंसू और समाज के माथे पर कलंक आ जाए।


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