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📖✍️ मैं शिक्षक हूँ

📖✍️

*मैं शिक्षक हूँ,*

सूरज की पहली किरण के साथ उठ जाता हूँ ।

हालात कैसे भी हों

मैं हरदम मुस्कुराता हूँ,

सही को सही कहना और गलत को गलत कहना,

हर छात्र को मैं सिखाता हूँ ।




*मैं शिक्षक हूँ,*

सूरज की पहली किरण के साथ उठ जाता हूँ,

हर रोज मैं नए - नए किरदारों में ढल जाता हूँ,

कभी बच्चों के साथ बच्चा,

कभी दोस्त तो कभी पिता जैसा बन जाता हूँ,

*मैं शिक्षक हूँ,*

सूरज की पहली किरण के साथ उठ जाता हूँ।

कच्ची मिट्टी के पुतलों को,

रोज एक नया आकार देता जाता हूँ,

सींचता हूँ हर रोज, हर फूल को मैं, प्रेम रुपी पानी से, फिर उस सुगंधित फूल को हर काँटे से मैं बचाता हूँ,

*मैं शिक्षक हूँ,*

सूरज की पहली किरण के साथ उठ जाता हूँ।

कभी प्यार से तो कभी गुस्से में,

मैं उनको समझाता हूँ,

अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर,

ज्ञान का दीपक भी तो उनके मस्तिष्क में जलाता हूँ ।

कभी हंस देता हूँ साथ बच्चों के

कभी अकेले में उनकी शरारत सोच कर मुस्कुराता हूँ।




*मैं शिक्षक हूँ,*

सूरज की पहली किरण के साथ उठ जाता हूँ।

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