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मतदाता सूची के लिए ई-सत्यापन प्रणाली शुरू

नई दिल्ली, । मतदाता सूची से नाम हटाने के दुरुपयोगों को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने ई-सत्यापन प्रणाली शुरू की है। इसके तहत नाम हटाने या जोड़ने पर आपत्ति दर्ज कराने वालों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक बार उपयोग होने वाला ओटीपी भेजा जाएगा।

एक अधिकारी ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि नाम हटाने की ऑनलाइन मांग करते समय कोई व्यक्ति किसी और का नाम या फोन नंबर दे देता है। इस नई सुविधा से ऐसे दुरुपयोग को रोका जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता ऑनलाइन फॉर्म-7 भरकर नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आवेदन जमा होते ही नाम खुद हट जाएगा। सत्यापन के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

कर्नाटक के आलंद विधानसभा में हुए दुरुपयोग के यह जवाब में नहीं : यह प्रणाली एक सप्ताह पहले लागू की गई थी और चुनाव अधिकारियों ने कहा कि यह कदम कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में हुए दुरुपयोग के जवाब में नहीं है।

आयोग के अनुसार, आलंद में फॉर्म-7 के जरिए 6,018 नाम हटाने के आवेदन ऑनलाइन जमा किए गए थे। जांच में केवल 24 आवेदन सही पाए गए, जबकि 5,994 गलत पाए गए। आयोग ने 24 को स्वीकार कर लिया और 5,994 को खारिज कर दिया।

‘मेरी मांगों पर चुनाव आयोग ने फैसला लिया’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को दावा किया कि उनके द्वारा मामला उठाने के बाद ही चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी पर रोक लगाई है। उन्होंने मुख्य चुना आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पूछा कि आलंद में मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में कर्नाटक सीआईडी को सबूत कब उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘ज्ञानेश कुमार, हमने चोरी पकड़ी, तब आपको ताला लगाना याद आया। अब चोरों को भी पकड़ा जाएगा।’ उन्होंने ई-सत्यापन प्रणाली की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें वोट जोड़ने या हटाने के लिए फोन नंबर सत्यापन जरूरी है।

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