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टेट परीक्षा से छूट, याचिका लगाने, एक्ट में संशोधन को सांसद से मिले शिक्षक

चन्दौली। जनपद चन्दौली के लोकप्रिय सांसद विरेन्द्र सिंह को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ चन्दौली के पदाधिकारियों व शिक्षक साथियों द्वारा प्रधानमंत्री को सम्बोधित पत्र सौंपा गया।


जिसमें २९ जुलाई २०११ से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट परीक्षा से छूट दिलाने के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने या विधायी शक्तियों का प्रयोग कर आर०टी०ई० एक्ट में संशोधन करने के लिए सांसद जी से पत्र तथा संसद में मुद्दा उठाने के लिए संगठन के सदस्यों द्वारा निवेदन किया गया है।


वहीं पत्र सौंपने तथा अध्यापकों की आवाज को संसद में उठाने के लिए मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष आनंद सिंह सहित सैकड़ो अध्यापक चन्दौली सांसद वीरेंद्र सिंह के आवास पर शनिवार को अर्दली बाजार टैगोर टाउन में पहुंचे। अध्यापक समूह द्वारा सांसद आवास पर ज्ञापन सौंपते


हुए विधाई शक्तियों का प्रयोग करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखवाया गया। सांसद ने इस विषय को


बहुत ही गंभीर विषय बताया और कहा कि 2011 के पूर्व सभी शिक्षक अपनी न्यूनतम अर्हता प्राप्त करके ही विभाग में आए हैं, ऐसे में उन लोगों को पुनः परीक्षा करना ठीक वैसे ही है जैसे किसी भी सीपीएमटी से कहा जाए की नीट की परीक्षा क्वालीफाई करें। ऐसे तो लगातार शिक्षक परेशानी में ही रहेगा तो बच्चों को स्वच्छ मन से पढ़ायेगा कब? उन्होंने बताया कि हम लोग भी प्राइमरी स्कूल में तथा देश के प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री सहित सभी लोग प्राइमरी में ही शिक्षा लेकर आए हैं इसलिए


आज इस तरह का स्थिति उत्पन्न कर देना अत्यंत चिंता की बात है सरकार को इस पर विचार करना चाहिए तथा माननीय न्यायालय को भी इस पर पुनर विचार करना चाहिए। चन्दौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने तुरन्त ही पत्र लिखकर रजिस्ट्री करा दिया तथा सत्र शुरू होने पर सांसद में भी उठाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक संघ के सभी ब्लॉक अध्यक्ष यशवर्धन सिंह, जय नारायण यादव, मंत्री चंद्रकांत सिंह, प्रवीण कुशवाहा, मंत्री रामाश्रय आर्य, प्रदीप सिंह, मोहम्मद अकरम, बृजेश त्रिपाठी, अजय सिंह, सुधीर सिंह, अविनाश राय सहित सैकड़ो अध्यापक उपस्थित रहे। तत्पश्चात उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष आनंद सिंह ने सांसद से आग्रह किया कि अध्यापकों हेतु निश्चित रूप से विधाई शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आगे आएं तथा न्यायालय भी इस विषय पर पुनर्विचार करें अगर ऐसा होता है तो ठीक नहीं तो आगे की रणनीति तैयार करके जल्द ही जंतर मंतर तथा रामलीला मैदान पर भारतवर्ष के सभी शिक्षक संगठन एक साथ एकत्रित होकर अपनी बात को रखने के लिए बाध्य होंगे।

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