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नौकरी के लिए आनंद बना सत्येंद्र, बदली जन्मतिथि, बीएसए ने किया बर्खास्त

कन्नौज। बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के लिए आनंद से सत्येंद्र बन गया। साथ ही जन्मतिथि भी सात साल दो माह और 25 दिन कम कर शैक्षणिक प्रमाणपत्रों ते शिक्षक बन गया। लोकायुक्त से मामले की शिकायत की गई, जिसके बाद बीएसए ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर बीएसए ने शनिवार को शिक्षक को बर्खास्त कर दिया।


कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद ब्लॉक के ग्राम मैजूसमस्तपुर निवासी लालबहादुर सिंह कुशवाहा ने लोकायुक्त बताया था कि गांव के रहने वाले आनंद बाबू ने अपना नाम सत्येंद्र सिंह कर लिया। इसके साथ ही जन्मतिथि में सात साल दो माह और 25 दिन कम करवा ली। इसके बाद शैक्षणिक प्रमाण पत्र हासिल कर वर्ष 2020 में शिक्षक बन गया। वर्तमान में आनंद बाबू कन्नौज के हसेरन ब्लॉक के दारापुर बरेठी गांव स्थित परिषदीय विद्यालय में सत्येंद्र सिंह नाम से तैनात है। लोकायुक्त ने बीएसए को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। बीएसए ने जांच के लिए उमर्दा बीईओ विपिन कुमार व छिबरामऊ बीईओ आनंद द्विवेदी की दो सदस्यीय कमेटी बनाई और शिक्षक से स्पष्टीकरण भी मांगा, लेकिन शिक्षक ने स्पष्टीकरण नहीं दिया और न ही शैक्षिक अभिलेख उपलब्ध कराए। इसके बाद जांच टीम शिक्षक के घर पहुंची, जहां जांच में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई और बीएसए संदीप कुमार ने शिक्षक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।

शिक्षक की पत्नी ने भी की मदद

बीएसए ने बताया कि शिक्षक की पत्नी अल्पना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के साथ बीएलओ भी थी। पत्नी ने मतदाता सूची में आनंद बाबू को मृत दिखाकर नाम हटाया और इसके बाद सत्येंद्र सिंह का नाम मतदाता सूची में फार्म 6 भरवाकर शामिल करा दिया। आनंद बाबू को भाई बताते हुए मृत्यु 2013 में दिखाई और 2025 में मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। बीएसए संदीप कुमार का कहना है कि शिक्षक सत्येंद्र सिंह ने जालसाजी, धोखाधड़ी, साक्ष्य मिटाते हुए फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल की है, जिसके चलते शिक्षक को बर्खास्त किया गया है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

मनरेगा जॉब कार्ड में मिली फोटो

शिक्षक सत्येंद्र ने आनंद बाबू की फोटो नहीं उपलब्ध कराई, जबकि शिकायतकर्ता ने मनरेगा जॉब कार्ड उपलब्ध कराया, जिसमें आनंद बाबू की फोटो लगी हुई थी और वही फोटो सत्येंद्र कुमार की है। राजस्व निरीक्षक ने आनंद बाबू और सत्येंद्र सिंह एक ही व्यक्ति होने की पुष्टि भी की है। वहीं, गांव के विवेक कुमार और जगत सिंह ने बताया कि सत्येंद्र सिंह को ही सभी बचपन से आनंद बाबू के नाम से पुकारते हैं। किसी आनंद बाबू की मृत्यु गांव में नहीं हुई।

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