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कोर्ट याचिका के दायरे के बाहर जाकर आश्चर्यचकित नहीं कर सकती" : सुप्रीमकोर्ट

"कोर्ट याचिका के दायरे के बाहर जाकर आश्चर्यचकित नहीं कर सकती" : #सुप्रीमकोर्ट

शिक्षकों को न्याय मिलना तय..👍

06 अक्टूबर को देश की #सर्वोच्च_न्यायालय ने एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण बात कही है


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"अदालतें किसी मामले से संबंधित याचिका के दायरे से बाहर जाकर पक्षकार को आश्चर्यचकित नहीं कर सकतीं और उन्हें याचिका में उठाए गए मुद्दों तक ही सीमित रहना चाहिए। यदि कोई अदालत किसी याचिका के दायरे के बाहर जाकर संबंधित बच्चों को आश्चर्यचकित करती है तो इससे अन्य संभावित वादियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि किसी असाधारण मामले में अदालत को रीट याचिका के दायरे के बाहर जाकर टिप्पणियां करने की आवश्यकता महसूस होती है तो कम से कम पक्षकार को अपना स्पष्टीकरण देने और अपना बचाव करने का अवश्य अवसर मिलना चाहिए।"

अब यदि सुप्रीम कोर्ट के इस टिप्पणी की माने तो #01सितंबर2025 को न्यायालय द्वारा देश के सभी कार्यरत प्राइमरी शिक्षकों के लिए #टीईटी_की_अनिवार्यता का आदेश पूर्णता अन्यायपूर्ण एवं असंवैधानिक तथा न्यायालय के मूल भावना के खिलाफ है।

क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में टेट की अनिवार्यता से छूट का था, और न्यायालय ने उस याचिका के दायरे से बाहर जाकर देश के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए जो टेट कानून लागू होने के पूर्व नियुक्त है उनके लिए भी टेट की अनिवार्यता का निर्णय सुनाकर पूरे देश को आश्चर्यचकित कर दिया।

इस अव्यवहारिक, असंवैधानिक एवं अन्यायपूर्ण आदेश से प्रभावित होने वाले पक्ष की ना तो बात सुनी गई न तो उसको नोटिस दिया गया ना तो उसको अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपनी बात रखने का मौका दिया गया सीधे-सीधे उनके ऊपर अपने आदेश को ठोक दिया गया जो की न्याय की हत्या के समान है।

उपरोक्त के परिपेक्ष्य में #06अक्टूबर2025 के सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से देश के लाखों-लाख शिक्षकों के लिए अत्यंत ही राहत भरी है।

शिक्षकों को न्याय मिलना पक्का है।👍

राजेश सिंह के fb पोस्ट से साभार 🙏🏻

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