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टीजीटी भर्ती परीक्षा में बिना टीईटी वालों को सम्मिलित करने के मामले में जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2025 में बिना टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को सम्मिलित करने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तीन दिन में मांगा है। कोर्ट ने मामले को आवश्यक मानते हुए यह भी कहा कि जवाब दाखिल नहीं किया गया तो माध्यमिक शिक्षा निदेशक अगली सुनवाई पर रिकॉर्ड के साथ उपस्थित हों।


यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एंड न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने जयहिंद यादव व अन्य की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे व अधिवक्ता संजय कुमार यादव को सुनकर दिया है। सीनियर एडवोकेट अशोक खरे व अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने कोर्ट को बताया कि 1989 में सीटी के डाइंग कैडर घोषित होने के बाद सरकार 1991 के शासनादेश के तहत एलटी ग्रेड शिक्षक से ही कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को पढ़वा रही है, जो शिक्षा तीन दिन में जवाब दाखिल न होने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक रिकॉर्ड के साथ उपस्थित हों के अधिकार अधिनियम 2009 के विपरीत है। 

उन्होंने बताया कि एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में निर्धारित किया गया है कि कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक का उच्च प्राथमिक टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। शिक्षक की योग्यता में छूट नहीं दी गई है। फिर भी प्रदेश सरकार जूनियर लेवल में न तो कोई भर्ती कर रही है और न ही एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार ही योग्य अध्यापक से पठन पाठ करा रही है। एनसीटीई की साफ गाइडलाइन है कि कक्षा एक से आठ तक बिना टीईटी पास किए कोई भी शिक्षक पढ़ा नहीं सकता है। सरकार 1989 के शासनादेश में शासकीय व अशासकीय विद्यालय में सीटी ग्रेड को डाइंग घोषित किए जाने और कोई नई नियुक्ति नहीं किए जाने की बात है। ऐसे में सीटी ग्रेड के अध्यापक को एलटी ग्रेड में सम्मिलित किया ।

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