*14 अक्टूबर 2025 के सचिव महोदय के आदेश की गलत व्याख्या अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा की जा रही है ।*
*इस आदेश में स्पष्ट है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक को प्रधानाध्यापक का वेतन देय है ।*
*मात्र उस अवस्था मे जबकि सीनियर प्रभार लेने को मना करें , तब जूनियर को प्रभार दिया जाए , लेकिन इस अवस्था मे जूनियर को प्रधानाध्यापक का वेतन नही दिया जाएगा ।*
*इस आदेश में सुधार करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में गिरी जी की एकल पीठ द्वारा भविष्य की किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए जिले स्तर पर वरिष्ठता सूची बनाकर प्रभार देने की बात की गई ।*
*साथ ही वरिष्ठता निर्धारित करते समय ये आवश्यक है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार , जब तक रिव्यु पेटिशन में कुछ नही आ जाता , टेट पास को ही वरिष्ठता सूची में स्थान दिया जा सकता है , अन्यथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना होगी ।*


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