दिल्ली हाईकोर्ट की फुल बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सीनियरिटी (वरिष्ठता) नियुक्ति की तिथि से तय होगी, न कि मेडिकल विलयर्स या चयन प्रक्रिया की तारीख से। इस फैसले से उन उम्मीदवारों को झटका लगा है, जिनकी नियुक्ति मेडिकल कारणों या अन्य वजहों से देर से हुई थी और वे अपने बैचमेट्स के बराबर वरिष्ठता की मांग कर रहे थे।
फुल बेंच ने कहा कि देरी से सेवा जॉइन करने वाले अभ्यर्थी अपने साथ चयनित अन्य उम्मीदवारों के समान वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकते, भले ही चयन एक ही प्रक्रिया में हुआ हो।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति में देरी प्रशासनिक या मेडिकल कारणों से हुई, जो उनकी गलती नहीं थी, इसलिए उन्हें भी समान वरिष्ठता दी जाए।
हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
न्यायालय ने कहा कि सेवा में वास्तविक रूप से प्रवेश (Joining Date) ही वरिष्ठता का आधार मानी जाएगी। चयन सूची या मेरिट लिस्ट की तारीख को वरिष्ठता का एकमात्र मानक नहीं बनाया जा सकता।


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