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आरओ/एआरओ और टीईटी भी हुई थीं निरस्त, दस महीने बाद बदला था परिणाम

प्रयागराज । असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा निरस्त होने से पहले भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए भाजपा सरकार में कड़े फैसले हो चुके हैं। इससे पहले 11 फरवरी 2024 को 58 जिलों में आयोजित समीक्षा अधिकारी (आरओ)/ सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) 2023 की प्रारंभिक परीक्षा भी पेपरलीक के कारण मुख्यमंत्री ने निरस्त कर दी थी। इस परीक्षा में पंजीकृत पौने 11 लाख अभ्यर्थियों में से तकरीबन साढ़े छह लाख शामिल हुए थे। उससे पहले 28 नवंबर 2021 को आयोजित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) भी पेपरलीक के कारण निरस्त करनी पड़ी थी। इससे पूर्व समाजवादी पार्टी की सरकार में 27 नवंबर 2016 को आयोजित आरओ/एआरओ 2016 की परीक्षा भी पेपरलीक के कारण निरस्त करनी पड़ी थी। यह भर्ती पूरी होने में पांच साल का समय लगा और पांच अप्रैल 2021 को अंतिम परिणाम घोषित हो सका था। 29 मार्च 2015 को लखनऊ के आलमबाग स्थित एक परीक्षा केंद्र से पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2015 का पेपर आउट हो गया था। आयोग ने सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्न पत्र की परीक्षा निरस्त कर 10 मई 2015 को दोबारा कराई थी।


दस महीने बाद बदला था परिणाम

प्रयागराज। प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों और प्रधानाध्यापकों की भर्ती के लिए 17 अक्टूबर 2021 को आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम भी दस महीने बाद संशोधित करना पड़ गया था। 15 नवंबर 2021 को घोषित परिणाम में सहायक अध्यापकों के लिए 45,257 और प्रधानाध्यापकों के लिए 1,722 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था। जिसके बाद कुछ अभ्यर्थियों ने कम अंक मिलने की शिकायत करते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने 12 अप्रैल 2022 को एक समिति का गठन करते हुए आपत्तियों की जांच कराई। 571 शिकायतों के मिलान में 132 शिकायतें सही पाई गई थी। इसके बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से छह सितंबर 2022 को घोषित संशोधित परिणाम में पूर्व में सफल 3369 अभ्यर्थी फेल हो गए थे।

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