*मैडम से परेशान अफसर*
शिक्षकों को अक्सर अपने विभाग के अफसरों से ढेरों शिकायतें रहती हैं। वहीं, अफसर हैं कि वे मैडमों से परेशान हैं। बात स्कूल वाली मैडमों की नहीं हो रही। अफसरों की परेशानी का सबब तो उनकी अपनी 'बॉस मैडम है।' माध्यमिक शिक्षा में लंबे समय तक प्रमुख रहीं एक आईएएस मैडम देर रात तक दफ्तर खुलवाती थीं। उनको रिसीव करने से लेकर 'सी-ऑफ' करने तक अफसरों को भी रात तक रुकना पड़ता था। उनसे मुक्ति मिली तो अफसरों ने बड़ी राहत की सांस ली थी। *अब बेसिक और माध्यमिक दोनों विभागों की हेड मैडम के काम का तरीका अफसरों को रास नहीं आ रहा। वह छुट्टियों में भी रोजाना दफ्तर खुलवा रही हैं। शनिवार और रविवार को भी दफ्तर खुलते हैं। थोड़ी बहुत देर के लिए नहीं, फुल टाइम। उसमें भी निर्देश ये हैं कि लेट बिल्कुल नहीं आना है। कोई लेट आया तो नोटिस मिल जाएगी। ज्यादातर काम भी ऐसे होते हैं कि वे स्कूलों के स्तर से होने हैं। स्कूलों की छुट्टियां चल रही हैं। जब स्कूल बंद हैं तो वे काम कैसे करवा लें? अब आदेश है तो अफसर आते हैं, दफ्तर में बैठते हैं। कागजों पर ही वे भी स्कूलों को निर्देश जारी कर देते हैं।


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