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गलत फैसले को आधार बनाकर अधिकारियों को आदेश पारित करने के लिए नहीं किया जा सकता है बाध्यः हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि प्रशासन ने किसी मामले में गलत निर्णय लिया है तो उसे आधार बनाकर दूसरे व्यक्ति के लिए वैसा ही अवैध आदेश पारित करने के लिए अधिकारियों को बाध्य नहीं किया जा सकता।


इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने अनुकंपा के तहत सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर आदित्य कुमार व एक अन्य की याचिका खारिज कर दी। यह मामला फतेहपुर का है। याचिकाकर्ताओं ने पिताओं की सेवाकाल के दौरान मौत होने पर सहायक अध्यापक के पद के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग उठाई तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने आवेदन खारिज कर दिया। इस पर याचियों ने बीएसए के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

वहीं, सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के अधिवक्ता ने दलील देते हुए शैलेंद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में फैसले का हवाला दिया। कहा कि 2024 में मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि सहायक अध्यापक के पद पर कोई अनुकंपा नियुक्ति नहीं की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि अनुकंपा के आधार पर सहायक शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।

वहीं, याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि इस आदेश के बावजूद जून से सितंबर 2025 के बीच विभिन्न जिलों में कई लोगों को इसी पद पर नियुक्तियां दी गई हैं। ऐसे में इसका लाभ न देना याचियों के साथ भेदभाव है।

इस पर कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि किसी पूर्व की गलती को दोहराने या दूसरे अवैध आदेश को जारी करने के लिए रिट याचिका के माध्यम से दबाव नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने याचिका योग्यता के आधार पर खारिज कर दी।

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