नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से पूरे देश में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (ई-20) की बिक्री अनिवार्य कर दी है। इसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) 95 होना जरूरी होगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के ज्यादातर राज्यों में पहले ही ई-20 पेट्रोल की बिक्री हो रही है। साथ ही 2023-25 के बाद भारत में निर्मित अधिकांश वाहनों को ई-20 पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे में इसे लागू करने में मुश्किल नहीं आएगी। हालांकि, पुराने वाहनों में माइलेज की समस्या आ सकती है। मंत्रालय ने ई-20 मिश्रित 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) वाले पेट्रोल की ब्रिकी अनिवार्य कर गाड़ियों के इंजन के जीवनकाल को बरकरार रखने का प्रयास किया है।
क्या होता है रॉन
रिसर्च ऑक्टेन नंबर पेट्रोल की गुणवत्ता और उसके नॉकिंग (समय से पहले प्रज्वलन) के प्रति प्रतिरोध क्षमता को मापने का पैमाना है। यह बताता है कि ईंधन कम गति और सामान्य तापमान पर इंजन में कैसा प्रदर्शन करेगा। उच्च रॉन का मतलब बेहतर प्रदर्शन होता है। आमतौर पर पेट्रोल की रॉन 91-98 के बीच रेटिंग होती है। P13


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