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चयन वेतनमान के इंतज़ार में 6 महीने बीते, सुनवाई न होने से शिक्षकों में नाराज़गी

चयन वेतनमान के इंतज़ार में 6 महीने बीते, सुनवाई न होने से शिक्षकों में नाराज़गी


लखनऊ।

चयन वेतनमान को लेकर शिक्षकों का इंतज़ार लगातार लंबा होता जा रहा है। वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में हो रही देरी से प्रदेश भर के शिक्षक खासे नाराज़ हैं। कई जिलों में ऑनलाइन चयन वेतनमान मॉड्यूल पर प्रक्रिया अधूरी पड़ी है, जिससे शिक्षकों को समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा।

शिक्षकों का कहना है कि जिला स्तर पर आदेश जारी होने के बावजूद वित्त एवं लेखा अधिकारियों के स्तर पर फाइलें अटकी हुई हैं। राजधानी लखनऊ समेत झांसी, एटा, सहारनपुर, रामपुर, जौनपुर, हरदोई, अमरोहा और इटावा जैसे कई जिलों में अब तक चयन वेतनमान लागू नहीं हो पाया है।

प्रदेश स्तरीय बैठकों में अधिकारियों को चयन वेतनमान शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों को आशंका है कि चयन वेतनमान में देरी के कारण आगामी वित्तीय वर्ष में उन्हें आयकर का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा, जिससे 70 से 80 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

शिक्षक संगठनों ने बताया कि कई बार उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

इस बीच शिक्षकों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए एक स्थायी समिति गठित करने की मांग भी उठी है, जो स्वतंत्र रूप से शिक्षकों की समस्याओं पर नजर रखे और सीधे शासन स्तर पर समाधान सुनिश्चित कराए। शिक्षकों का कहना है कि निरंतर उपेक्षा से उनमें सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है और मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

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