प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से कटौती केवल सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुच्छेद 351-ए के तहत विधिसम्मत अनुमति और विधिवत विभागीय कार्यवाही के बाद ही की जा सकती है। कोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य से लगभग 11 लाख रुपये की वसूली आदेश रद कर दिया है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर है, इसलिए संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार राज्यपाल की वैध अनुमति लेकर और विधिवत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ कर आगे कार्रवाई कर सकते हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सुरेंद्र दत्त कौशिक की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याची सर्वोदय मंदिर इंटर कालेज बागपत प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन पर मिड-डे मील/पीएम पोषण योजना के तहत लगभग 11,14,160 रुपये के गबन का आरोप लगाया गया था। सेवाकाल में कोई विभागीय जांच नहीं की गई। सेवानिवृत्त होने के बाद वसूली आदेश जारी किया गया। याची ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 के आदेश से बीएसए बागपत के 20 मई 2023 के आदेश और ब्लाक विकास अधिकारी बड़ौत के 24 मई 2023 के आदेश को रद कर दिया था। साथ ही निर्देश दिया कि याची को विधि अनुसार सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। यह भी कहा था कि यदि कानून के अंतर्गत संभव हो तो वसूली की जा सकती है।


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