गिग व प्लेटफॉर्म कर्मियों के लिए एनपीएस अनिवार्य करने पर सरकार का विचार, सामाजिक सुरक्षा देने की तैयारी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार गिग और प्लेटफॉर्म आधारित कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार तेजी से बढ़ा है। ड्राइवर, डिलीवरी पार्टनर, फ्रीलांसर और अन्य गिग वर्कर्स बड़ी संख्या में कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कर्मचारी भविष्य निधि या पारंपरिक पेंशन योजनाओं के दायरे में नहीं आते। ऐसे में सरकार इन्हें नियमित पेंशन व्यवस्था से जोड़ने की योजना बना रही है।
अंशदान की जिम्मेदारी तय करने पर मंथन
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि एनपीएस में योगदान किस प्रकार तय किया जाए। एक संभावित मॉडल में कर्मचारी, प्लेटफॉर्म कंपनी और सरकार तीनों मिलकर अंशदान कर सकते हैं। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। उद्योग जगत का मानना है कि कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ का आकलन भी आवश्यक होगा।
डिजिटल तरीके से जुड़ना होगा आसान
गिग वर्कर्स को एनपीएस से जोड़ने के लिए आधार आधारित सत्यापन और ऐप के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण की व्यवस्था प्रस्तावित है। साथ ही यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए एक क्लिक में एनपीएस खाता खोलने की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे खाता खोलने की प्रक्रिया सरल और सुलभ हो सके।
ऑटो-नामांकन और अटल पेंशन योजना की समीक्षा
सरकार ऑटो-एनरोलमेंट मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिसमें श्रमिकों को स्वतः योजना में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र के लिए चल रही अटल पेंशन योजना की भी समीक्षा की जाएगी, जिसमें वर्तमान में लगभग 86 मिलियन ग्राहक हैं, लेकिन सक्रिय योगदानकर्ताओं की संख्या करीब 50 प्रतिशत ही है।
सरकार का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना
सरकार का मानना है कि एनपीएस को गिग और प्लेटफॉर्म कर्मियों के लिए लागू करने से उन्हें भविष्य में नियमित पेंशन और आर्थिक स्थिरता मिल सकेगी। यह कदम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


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