सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी युवती के निजी अंग को पकड़ना और नाड़ा खोलना दुष्कर्म के प्रयास का अपराध है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह ‘दुष्कर्म की कोशिश’ नहीं, बल्कि सिर्फ ‘तैयारी’ थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसले में कहा, हाईकोर्ट ने तय आपराधिक कानून के सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल और व्यख्या की है। पीठ ने मामले में कासगंज के विशेष जज द्वारा जून, 2023 को आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत जारी किए गए दुष्कर्म के प्रयास के मूल समन को बहाल कर दिया। पीठ ने साफ किया कि शीर्ष कोर्ट ने फैसले में जो टिप्पणी की हैं, वे केवल शिकायतकर्ता द्वारा पेश मामले के प्रथम दृष्टया परिप्रेक्ष्य में की गई हैं। इन्हें आरोपियों की दोषसिद्धि को लेकर कोई राय नहीं समझा जाए।
यह है मामला : विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) की अदालत में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि 10 नवंबर, 2021 को शाम पांच बजे शिकायतकर्ता महिला 14 वर्षीय बेटी के साथ ननद के घर से लौट रही थी। रास्ते में उसके गांव के ही तीन लोग मिले। तीनों ने उसकी बेटी को बाइक से घर छोड़ने की बात कही। मगर आरोपियों ने रास्ते में लड़की के निजी अंग पकड़ लिए। एक आरोपी आकाश ने लड़की को खींचकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की और नाड़ा खींच दिया। चीख सुनकर दो व्यक्ति वहां पहुंचे, जिन्हें देख आरोपी भाग गए।
इस मामले में लगे आरोपों को सरसरी तौर पर देखने पर भी रत्तीभर संदेह की गुंजाइश नहीं रहती कि आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (रेप) के तहत अपराध करने के पूर्व निर्धारित इरादे से ये हरकतें कीं। - सुप्रीम कोर्ट की पीठ


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