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उच्च न्यायालय लखनऊ में शिक्षक समायोजन पर जोरदार बहस, बिना सहमति समायोजन पर उठे गंभीर सवाल

आज मा० उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ (Allahabad High Court) के समक्ष शिक्षक समायोजन प्रकरण में Adv. Rajneesh Tiwari द्वारा विस्तृत व प्रभावी बहस प्रस्तुत की गई।

🔹 आज की सुनवाई में उठाए गए प्रमुख बिंदु:

विधानसभा में दिए गए उत्तर के विपरीत लगभग 47,000 पद रिक्त होने के बावजूद बार-बार समायोजन क्यों?

समायोजन 1 एवं 2 के तुरंत बाद समायोजन 3 की आवश्यकता क्या थी?

सरप्लस सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

पूर्व की भांति 25 विकल्प दिए बिना समायोजन क्यों?

PTR निर्धारण में शिक्षामित्र/अनुदेशक को शिक्षक मानने का विधिक आधार क्या है?



महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों को वरीयता क्यों नहीं दी गई?

विषयगत आवश्यकता की अनदेखी कर समायोजन क्यों किया गया?

कंपोजिट विद्यालयों से, जहाँ पहले से पद रिक्त हैं, शिक्षकों को हटाया जाना क्या छात्रों के हित में है?

23/05/2025 के शासनादेश के अनुसार शिक्षक की सहमति (Consent) आवश्यक होने के बावजूद उसे क्यों नहीं देखा गया?

प्रदेशभर में समायोजन नियमों में एकरूपता क्यों नहीं रही?

🔹 विशेष आपत्ति

दिनांक 23/05/2025 के शासनादेश की अवहेलना कर बिना शिक्षक की सहमति के समायोजन किया जाना न्यायसंगत नहीं है — यह प्रमुख रूप से न्यायालय के समक्ष रखा गया।*

सभी शिक्षक साथियों से निवेदन है कि संयम बनाए रखें एवं अपने समस्त अभिलेख सुरक्षित रखें।

विधिक टीम आपके अधिकारों की रक्षा हेतु पूर्ण प्रतिबद्ध है।

— Adv. Rajneesh Tiwari

मा० उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के साथ साथ

आपका शिक्षक साथी

आनन्द प्रताप सिंह

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