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कर नियमों में दंड की जगह शुल्क और रियायत का प्रावधान

उद्योग जगत के लिए इस बजट का मुख्य फोकस ईज ऑफ डूइंग बिजनेस है। कर नियमों को सरल और गैर-अपराध बनाया गया है। कई मामलों में दंड की जगह शुल्क और रियायतों का प्रावधान किया गया है। इससे देश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। नए उद्योग खुलने और पुराने उद्योगों को विस्तार को भी मदद मिल सकेगी, जिसका लाभ लंबे समय में देश के आर्थिक विकास को मिलेगी।


वहीं, सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को कौशल, रोजगार और उद्योग से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की गई है। ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा योजना को नए स्वरूप में बदला गया है, जिसके बजट में 42 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

उधर, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पांच यूनिवर्सिटी टाउन विकसित किए जाएंगे और हर जिले में एक बालिका छात्रावास बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। आयकर दरों में इस बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कृषि क्षेत्र के बजट में सात प्रतिशत, स्वास्थ्य क्षेत्र में 10 प्रतिशत और शिक्षा क्षेत्र के बजट में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पूंजीगत व्यय में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित कर इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक लाया गया है।

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