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‘भरण-पोषण सतत अधिकार है’: हाईकोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण को क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति खारिज कर दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण के अधिकार को सतत अधिकार मानते हुए क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का अधिकार एक निरंतर चलने वाला अधिकार है। अतः जिस स्थान पर पत्नी निवास कर रही है, वहीं की अदालत को वाद सुनने का अधिकार होगा। केवल इस आधार कि मूल कारण किसी अन्य स्थान से संबंधित है, पर न्यायालय के क्षेत्राधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।


यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सीमा पांडेय की याचिका पर उसकी ओर से एडवोकेट गौरव द्विवेदी के ब्रीफ पर एडवोकेट प्रखर शुक्ल को सुनकर दिया है। अधिवक्ता द्वय ने तर्क रखा कि सैन्यकर्मी की पत्नी याची को भारतीय सेना अधिनियम 1950 की धारा 90 के तहत पति के वेतन से भरण-पोषण के लिए कटौती का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और संबंधित अधिकारी के समक्ष लंबित अभ्यावेदन पर समयबद्ध निर्णय आवश्यक है।

कोर्ट ने प्रारंभिक क्षेत्राधिकार पर विपक्षी को आपत्ति को अस्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित कमांडिंग ऑफिसर याची के अभ्यावेदन पर 60 दिन के भीतर विधि अनुसार निर्णय लें।

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