आरोपियों पर दुर्घटना के बाद कार की पिछली सीट पर बैठे दो नाबालिगों के खून के नमूने बदलने का आरोप है। पुणे में यह कार हादसा 19 मई, 2024 को कल्याणी नगर में हुई जिसमें अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी।
यह था मामला
इसलिए दी जमानत
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह देखते हुए आरोपियों को जमानत दे रहे हैं कि वे लंबे समय से जेल में बंद हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि हमें इस पर बहुत कुछ कहना है। दो बेगुनाह जानें चली गईं और फिर ये सारी साजिशें। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभी हम विस्तृत निष्कर्ष देने से बच रहे हैं, क्योंकि इससे मामले का ट्रायल प्रभावित हो सकता है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि माता-पिता के पास बच्चों के लिए वक्त नहीं है, इसलिए वे अपने बच्चों को एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन दे देते हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों के नशे में गाड़ी चलाने से होने वाले हादसों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने पुणे में नाबालिग द्वारा लापरवाही से लग्जरी (पोर्शे) कार चलाने से हुए हादसे में खून के नमूने बदलने के तीन आरोपियों को जमानत देते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। जस्टिस नागरत्ना ने ऐसे हादसों पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसे माता-पिता कितने गैर-जिम्मेदार होते हैं जो नाबालिग बच्चों को तेज रफ्तार कार चलाने देते हैं, उन्हें शराब ड्रग्स जैसी चीजों के साथ जश्न मनाने की इजाजत देते हैं। नशा और तेज रफ्तार गाड़ी चलाना, सड़क पर बेगुनाह लोगों को मारना या सड़क पर सो रहे बेगुनाह लोगों को मार देना जश्न नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह आजादी बनाम यह सब है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इस हादसे में दो बेगुनाह लोग मारे गए। यह पहली बार नहीं हुआ है, सड़क पर बेगुनाह लोग सो रहे होते हैं। इसके लिए माता-पिता जिम्मेदार हैं जो नाबालिग बच्चों को मौज-मस्ती के लिए पैसे देते हैं। यह मामला तब ज्यादा प्रकाश में आया था जब पोर्शे कार चलाने वाले नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड ने 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त पर जमानत दे दी थी।


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