लखनऊ। देश भर के परिषदीय शिक्षक संसद के वर्तमान सत्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता से राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि हाल ही में संसद में शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब से शिक्षक संगठन असंतुष्ट हैं। उन्होंने जल्द ही इस मामले में राहत न दिए जाने पर दोबारा आंदोलन शुरू करने व दिल्ली मार्च का एलान किया है।
टेट अनिवार्यता को लेकर देश भर के शिक्षक काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि संसद के बजट सत्र में केंद्र सरकार उन्हें कुछ राहत देने का एलान करेगी। किंतु हाल ही में लोकसभा में शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी द्वारा दिए गए उत्तर में किसी राहत की बात नहीं कही गई। इससे प्रदेश के लगभग दो लाख समेत देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षक निराश हुए हैं।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पूर्व में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने शिक्षकों से कहा था कि वे उनके साथ हैं। अब संसद में उसके विपरीत बयान दे रहे हैं। केंद्र ने सभी राज्यों से जो आंकड़े व सूचनाएं मांगी थी, क्या वो सब झूठ है। उनके जवाब में भी राज्यों से सूचना मांगने और विचार करने का उल्लेख होना चाहिए था। ऐसा लगता है कि शिक्षा मंत्रालय किसी को शांति से नहीं बैठने देगा। उन्होंने कहा कि जल्द सकारात्मक परिणाम न मिलने पर दोबारा आंदोलन पर निर्णय लिया जाएगा।
वहीं अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष
सुशील कुमार पांडेय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम सभी शिक्षकों को काफी पीड़ा हो रही है। जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है तो किसी भी जनप्रतिनिधि को इस तरह उत्तर देना न्यायालय के निर्देश कि अवमानना है। अभी न्यायायिक प्रक्रिया गतिमान है। हम सबको थोड़ा इंतजार करना होगा। इससे किसी भी शिक्षक का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार या एनसीटीई सर्वोच्च न्यायालय के टीईटी अनिवार्यता संबंधी आदेश को निरस्त करने में हस्तक्षेप नहीं करती है। या नियमावली में संशोधन करने में अपना सहयोग नहीं करती है तो देशभर के लाखों शिक्षक अपने हक के लिए दिल्ली मार्च करेंगे। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार के जवाब से प्रदेश भर के शिक्षक चिंतित हैं। क्योंकि इसमें किसी तरह की राहत नहीं दी गई है।


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