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बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रमुख सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

​बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रमुख सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा


​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों के स्थानांतरण और डाटा अपडेशन के मामले में अदालती आदेशों की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने चित्रकूट निवासी लवकेश अग्रवाल और अन्य की याचिका पर दिया है।

​याची ने स्थानांतरण के खिलाफ प्रत्यावेदन संबंधित अधिकारियों को दिया था, जिसे 28 मार्च 2026 को खारिज कर दिया गया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची का आरोप था कि अधिकारियों ने यू-डायस पोर्टल पर डाटा अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही आनन-फानन उसके प्रत्यावेदन को खारिज कर दिया। पुराने स्थानांतरण आदेश को बरकरार रखा।

​इससे पहले 17 फरवरी 2026 को अरुण प्रताप सिंह मामले में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि आरटीई अधिनियम-2009 के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को सही बनाए रखने के लिए सबसे पहले यू-डायस पोर्टल पर डेटा को सत्यापित और अपडेट किया जाए। इसके बाद ही शिक्षकों की तैनाती या स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।

​कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना और समय का पालन न करने वाली कार्रवाई मानी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब डाटा अपडेशन के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था और डिवीजन बेंच ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए समय सीमा बढ़ाई थी तो ऐसी स्थिति में प्रक्रिया पूरी होने से पहले आदेश पारित करने का कोई औचित्य नहीं था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों की इस निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने वर्तमान याचिकाओं में भी अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
हाइलाइट्स:
  • ​स्थानांतरण के खिलाफ प्रत्यावेदन खारिज करने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की गई है याचिका
  • ​प्रमुख सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा तलब
  • ​अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

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