लखनऊ। । अनुसूचित जाति जनजाति के मेधावी छात्रों तथा उद्यमिता विकास में बेहतर रहे युवाओं की मदद के लिए राज्य सरकार आगे आई है। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े दलित वर्ग के युवाओ तथा मेधावी छात्रों के लिए दो नई योजना शुरू की गई है। मानसून सत्र के दौरान दोनों योजनाओं के लिए बजट का भी प्रावधान कर दिया गया है, ताकि योजना को आगे बढ़ाने में धन की कमी आड़े न आए।
सामाजिक उन्नति एवं कल्याण योजना के तहत अनुपूरक बजट में 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसमें योजना के लिए राजस्व व्यय पर 20 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय के रूप में पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के कमजोर तथा वंचित युवाओं की उद्यमिता विकास, स्किल डेवलेपमेंट, तकनीक ज्ञान से लैस किया जाएगा, ताकि वह अपना रोजगार शुरू कर सकें।
मुख्यमंत्री मेधावी अनुसूचित जाति जनजाति उच्च शिक्षा सहायता योजना के लिए अनुपूरक बजट में दो करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके तहत उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे दलित वर्ग के कमजोर छात्रों की मदद की जाएगी। अभी पढ़ाई के लिए समाज कल्याण विभाग केवल शुल्क प्रतिपूर्ति देता है। इस योजना के तहत आईआईटी, मेडिकल, रिसर्च स्कॉलर की वित्तीय मदद की जाएगी।
अच्छे आइडिया को स्टार्टअप में बदलने में सहायता देंगे
दलित वर्ग के छात्रों के अच्छे आइडिया को स्टार्टअप में बदलने में मदद की जाएगी। इसकी शुरुआत आश्रम पद्धति विद्यालयों के स्तर से हो सकती है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही उद्यमिता विकास के लिए तैयार किया जाएगा। कौशल विकास, छोटे उद्योगों की ट्रेनिंग, छोटे-छोटे वैज्ञानिक सोच वाले उत्पादों के प्रोटोटाइप आदि बनाने में मदद की जाएगी। स्कूली ही नहीं तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों की भी मदद की जाएगी।


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