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69000 शिक्षक भर्ती की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के जज की निगरानी में हो-बंटी पाण्डेय

69000 शिक्षक भर्ती में प्रतियोगी छात्र छात्राओं के साथ बहुत नाइंसाफी हुई है उन्होंने आरोप लगाया है कि इस शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली हुई है।उनका आरोप यह भी है कि इस भर्ती प्रक्रिया में सत्ताधारी दल के कुछ लोग शामिल हैं तमाम संचार माध्यमों से सरकार की करतूत सामने आ गई है।उन्होंने मांग की है कि इस इस 69000 शिक्षक भर्ती के महाघोटाले की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के जज के निगरानी में कराई जाए।पूरा शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार की दलदल में फंसा हुआ नजर आरहा है।एक तरफ से अभी 69000 शिक्षक भर्ती में घोटाला सामने आया है और साथ में अब फर्जी शिक्षक वेतन महाघोटाला सामने आ गया है।कई जगह फर्जी शिक्षक पकड़े जा रहे हैं।सत्ता का गिरोह चल रहा है या शिक्षा विभाग में डकैतों का गिरोह चल रहा है क्या इस गिरोह में सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।


जिसकी वजह से शिक्षा विभाग में लूट चल रही है जिसका खामियाजा प्रतियोगी छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।इस 69000 की CBI जाँच इसलिए आवश्यक हो गयी है क्योंकि लोगो का आरोप यह भी है कि इस 69000 शिक्षक भर्ती में सब कुछ बिकता हुआ नजर आरहा है।लोगो का कहना है कि इस परीक्षा में बिके हैं शिक्षक के पद,बिके हैं गरीब के सपने,बिकी हैं माँ बाप की नींद,बिका है योग्य की आंखों का सपना,बिका है योग्य का सुनहरा भविष्य,बिका है योग्य अभ्यर्थी का शिक्षक बनने का सपना।आखिरकार ये सब जो बिकता हुआ नजर आरहा है,उसकी मुख्य जड़ कौन है।लोगो का आरोप यह भी है कि इस 69000 शिक्षक भर्ती का पेपर 6 जनवरी 2019 को हुआ था लेकिन उत्तरकुंजी और पेपर परीक्षा होने से पहले ही वायरल हो गया था।इस शिक्षक भर्ती की न्यायिक जांच आवश्यक इसलिए हो गयी है क्योंकि प्रतियोगी छात्रों के साथ बहुत अन्याय हो रहा है।लोगो का आरोप यह भी है कि जो अभ्यर्थी इस भर्ती में 143 नम्बर के साथ उत्तीर्ण है उसे अपने राष्ट्रपति तक का नाम नही पता है।इस शिक्षक भर्ती में यदि लखनऊ खंडपीठ की सिंगल बेंच से स्टे नही मिला होता तो आप आंकड़ा लगाइये ऐसे अध्यापक स्कूलों में पढ़ाते हुए नजर आते जिन्हें राष्ट्रपति तक का नाम नही पता सोचिये वो क्या पढ़ाते।पूरी युवा पीढ़ी की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर बना देते।सबसे बड़ा इस भर्ती को लेकर खुलासा कल भारत समाचार ने किया है कि जो संस्था उत्तर कुंजी को जांचने का कार्य करती है उसका भी इस भर्ती में धांधली कराने में बड़ा हाँथ है।जिसकी एक संस्था प्रयागराज में स्थित है।कुल मिलाकर अभी तक के आंकड़ों का अगर आंकलन किया जाय तो इस शिक्षक भर्ती का रद्द होना सुनिश्चित लग रहा है और पेपर दुबारा कराने के आसार दिखाई दे रहे है यही एक विकल्प सरकार के पास बचा है।

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