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69000 शिक्षक भर्ती: परीक्षा रद्द और नियुक्तियों पर अभ्यर्थियों में दो गुटों में बंटे

प्रयागराज : 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर प्रतियोगियों के दो खेमे इन दिनों आमने-सामने हैं। जिन अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है, वे आवंटित जिलों में हर हाल में नियुक्ति चाहते हैं, वहीं जो चयन सूची में जगह नहीं बना सके या फिर परीक्षा में ही शामिल नहीं हुए थे, वे लिखित परीक्षा को रद कराने और सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अभियान चल रहा है।


  • 67867 चयनित अभ्यर्थी हर हाल में चाहते हैं आवंटित जिलों में नियुक्ति
  • चयन सूची में जगह न पाने वाले चाहते हैं भर्ती रद व सीबीआइ जांच
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम 12 मई को आने के बाद से अनुत्तीर्ण रहने वाले अभ्यर्थियों ने बाकायदे परीक्षा के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। हालांकि इसके बाद भी जिला आवंटन आदि प्रक्रिया पूरी हुई, काउंसिलिंग के समय एकाएक प्रक्रिया कोर्ट के आदेश पर रुकने से इसमें तेजी आई है। अब जिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलनी है, वे इसके पक्ष में डटकर सामने आ गए हैं। निरंजन सिंह की अगुवाई में ट्विटर पर अभियान शुरू हो गया है। उनका कहना है कि चयन सूची के असफल अभ्यर्थी लगातार अफवाहें फैला रहे हैं। इन अफवाहों की वजह से राजनीतिक दल आदि चयनितों पर सवाल उठा रहे हैं। निरंजन का कहना है कि 18 माह से नियुक्ति पाने की राह देख रहे हैं अब इस तरह की साजिश बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस अभियान में सुनील कुमार, आशीष श्रीवास्तव, प्रत्यूष राय, श्रेयश सिंह, आशीष पटेल, अंबुज मिश्र, अभिषेक व हर्षित आदि शामिल हैं।

दूसरी ओर न्याय मोर्चा के उप्र संयोजक सुनील मौर्य आदि का कहना है कि भर्ती की लिखित परीक्षा से संबंधित नित-नए मामले सामने आ रहे हैं। सरकार सीबीआइ जांच नहीं करा रही है और न ही भर्ती को रद करने की मंशा है। मौर्य का कहना है कि एक गिरोह भ्रष्टाचार में लिप्त मिला है। उस पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। सीबीआइ जांच होने पर ही स्थिति साफ होगी। उनका कहना है कि भर्ती रद होने तक अभियान जारी रहेगा।

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