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परिषदीय विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में पास कराने का ठेका लेने वाले आठ लोग गिरफ्तार, कई फरार

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सहायक शिक्षक पद पर भर्ती कराने का ठेका लेने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। सोरांव पुलिस ने गैंग के सरगना स्कूल प्रबंधक केएल पटेल, प्रधान श्रवण दुबे, उसके भाई रुद्रपति व शशि प्रकाश सरोज, हरिकृष्ण सरोज, कमल पटेल, रंजीत और आलोक उर्फ धर्मेद्र सरोज को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से साढ़े सात लाख रुपये, दो कार, कृषि विभाग का नियुक्ति पत्र, कई अभ्यर्थियों के मार्कशीट व दूसरे दस्तावेज बरामद हुए हैं। प्रधान का भाई मायापति समेत कई आरोपित अभी फरार हैं। श्रवण दुबे भदोही जिले के कोइरौना थाना क्षेत्र के बारीपुर गांव का और आलोक मीरजापुर का निवासी है। अन्य अभियुक्त प्रयागराज के रहने वाले हैं।

पुलिस के मुताबिक प्रतापगढ़ के लालगंज थाना क्षेत्र के बहुचरा गांव निवासी राहुल सिंह बीएड करने के बाद शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा था। उसका आरोप है कि फरवरी माह में रुद्रपति दुबे समेत अन्य लोग मिले। बताया कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में बहुत अच्छा जुगाड़ है। अगर साढ़े आठ लाख रुपये दो तो नियुक्ति करवा देंगे। इस पर राहुल ने 26 मई को सोरांव में अभियुक्तों को साढ़े सात लाख रुपये दिए। रुद्रपति के साथियों ने राहुल से शैक्षणिक दस्तावेज ले लिया और कहा कि 20 और लोग हैं, जिनकी नियुक्ति करानी है। एक जून को रिजल्ट आया तो राहुल का नाम नहीं था। धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद जब पीड़ित ने पैसा लेने वालों की तलाश शुरू की तो गिरोह के बारे में पता चला। शिकायत मिलने के बाद एएसपी सोरांव केवी अशोक ने गैंग की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा दिया। गुरुवार को पता चला कि सहायक शिक्षक भर्ती में काउंसिलिंग रद्द होने के कारण गिरोह के सदस्य फाफामऊ इलाके में मौजूद हैं तो उन्हें पकड़ लिया गया। फिर भदोही में छापा मारकर ग्राम प्रधान को भी दबोच लिया गया।

परीक्षा में पास कराने से लेकर नियुक्ति तक का ठेका : पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य परीक्षा पास कराने से लेकर काउंसिलिंग व नियुक्ति कराने तक का ठेका लेते थे। अलग-अलग विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके खेल करते थे, जिसकी जांच चल रही है। अभियुक्तों ने यूपीटेट परीक्षा पास कराने के लिए बलवंत नामक छात्र से भी आठ लाख रुपये लिए थे। पैसा देने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही उत्तरकुंजी उपलब्ध करवा देते थे। गिरोह के सदस्य यूपी टीईटी और सुपर टेट परीक्षा में भी ऐसा ही खेल करते थे।

किसी को एक तो किसी को दो लाख

पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि कथित छात्र संदीप ने बलवंत नामक छात्र खोजकर यूपीटेक परीक्षा में पास कराने की बात कही थी। वह अपने सीनियर कमल और रंजीत के संपर्क में रहता था। रंजीत ही ग्राम प्रधान को अभ्यर्थी उपलब्ध करवाता था। इस काम के लिए एक कंडीडेट पर एक से दो लाख रुपये तक मिलते थे।

स्कूल से आउट होता था पर्चा

पुलिस का कहना है कि सरगना केएल पटेल जिला पंचायत का पूर्व पदाधिकारी है। उसके चार स्कूल हैं। वह कतिपय अधिकारियों की मिलीभगत से अपने स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनवाता था और फिर वहीं से पर्चा आउट कराने के बाद अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता था। भदोही के एसपी रामबदन का कहना है कि पकड़ा गया ग्राम प्रधान काफी शातिर है।

पेपर लीक करने और परीक्षा में पास कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। सोरांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश चल रही है।

- सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसएसपी

डायरी में मिले अभ्यर्थियों के नाम

अभियुक्तों के पास से पुलिस को एक डायरी भी मिली है। उसमें सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े कई अभ्यर्थियों के नाम व पता दर्ज हैं। अनुमान है कि शातिरों ने इन अभ्यर्थियों से पैसे लिए होंगे।

’>>स्कूल प्रबंधक, ग्राम प्रधान भी गिरफ्तार किए जाने वालों में शामिल

’>>साढ़े सात लाख रुपये दो कार व नियुक्ति पत्र समेत कई दस्तावेज बरामद


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