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योग्य होने से ही नहीं मिल जाता नियुक्ति पाने का विधिक अधिकार: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि योग्यता होने से किसी व्यक्ति को चयनित होने और नियुक्ति पाने का विधिक अधिकार नहीं प्राप्त नहीं होता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने को प्रक्रिया शुरू करने का आदेश देने की मांग में दाखिल याचिका खारिज करते हुए की है। अदालत का कहना है कि यह नियोजक पर है कि वह खाली पदों को भरे अथवा नहीं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए


याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने सौरभ कुमार सिंह और अन्य की याचिका पर दिया है । याचिका पर अधिवक्ता सत्येन्द्र त्रिपाठी, आयोग की तरफ से अधिवक्ता कृष्णजी शुक्ल ने बहस पर याची अधिवक्ता का कहना था कि डिग्री कालेजों में पिछले पांच साल से सहायक प्रोफेसर की भर्ती नहीं निकाली गई। चार हजार पद खाली हैं। याचीगण पीएचडी व राष्ट्रीय दक्षता परीक्षा पास है। सहायक प्रोफेसर पद पर चयनित होने की अर्हता रखते हैं। आयोग को हर साल भर्ती निकालने और खाली पदों को भरने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि याचियों को ऐसी मांग करने का विधिक अधिकार नहीं है। सरकार को प्रशासनिक, आर्थिक या नीतियों के चलते पदों को भरने या न भरने का अधिकार है। सरकार चाहे तो पद समाप्त, या पदों की संख्या घटा सकती है या खाली पदों को भर सकती है। तब तक इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है जब तक सरकार का फैसला दुर्भावना पूर्ण हो या विवेकाधिकार का प्रयोग न किया गया हो, या अन्य कारणों से प्रभावित होकर कार्य न किया जा रहा हो।

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