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सुप्रीम कोर्ट में 29334 गणित-विज्ञान शिक्षक भर्ती मामले में 15 सितम्बर को हुई सुनवाई का विस्तृत सार, याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट में 29334 गणित-विज्ञान शिक्षक भर्ती मामले में 15 सितम्बर को हुई सुनवाई का विस्तृत सार, याचिका खारिज

सभी प्रोफेशनल साथियों को अनिल राजभर का नमस्कार ।। आज प्रोफेशनल कंटेम्प्ट केस खारिज़ हो गया। नियुक्ति के पांच साल बाद तक विरोधी वैध शिक्षको को किसी न किसी केस में फॅसा कर परेशान करते रहे किन्तु बिगाड़ कुछ न पाए ।चयन सूची में स्थान न पाने के कारण ये याचिकाकर्ता याची लाभ चाहते थे किंतु उन्हें याची लाभ न मिल सका। साथियों अपना केस 12:05 पर शुरू हुआ 12 :45 तक चला।विरोधी लोगों की तरफ से 5


एडवोकेट किये गए थे। सभी ने कोर्ट को शैक्षिक योग्यता विज्ञान/गणित स्नातक बता कर गुमराह करना चाहा। किन्तु जज साहब ने 1981 नियमावली के रूल 8(2) पढने को कहा जिसमें लिखा था भारत मे विधी द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से स्नातक या समकक्ष उपाधि जिसमे गणित या विज्ञान विषय पढ़ा हो। जबकि विरोधी के वकील उसके बीएससी विज्ञान या बीएससी गणित बता कर गुमराह कर रहे थे । फिर जज साहब ने ओमकार सिंह केस के पैरा 9 को पढ़ने को बोला उसमे भी स्नातक की उपाधि में गणित या विज्ञान विषय चेक करने को कहा गया था । किन्तु विरोधियों की तरफ से बार बार उसे बीएससी की उपाधि बताने का प्रयास किया गया। तब भी बात नहीं बनी जज साहब गोल्डन रूल ऑफ interperation पर अड़ गए कि आप लोग सर्विस रूल को गलत समझ रहे हो उसमे कही बीएससी नही लिखा है ।फिर विरोधी वकील बीफार्मा,बीबीए,बीएससी ag और होम साइंस के खारिज़ हुए पुराने आदेश दिखा कर इन डिग्री धारकों को अवैध बताया और ये बताया कि इन्होने बैक डोर से एंट्री ले ली भर्ती में। जिसे जज साहब ने नहीं माना उन्होंने कहा हाई कोर्ट में जो भी आर्डर हुए किन परिस्थितियों में हुए मुझे पता नही। किन्तु सुप्रीम कोर्ट का 16 जुलाई 2019 का आदेश इन प्रोफेशनल के पक्ष में हुआ है।आज की तारीख में यही आर्डर फाइनल है यदि आप को इस आर्डर से आपत्ति थी तो रिव्यु क्यों नही किया आपने उस समय अब कुछ नहीं हो सकता। ये लोग पूर्णतया वैध हैं 5 साल से नियुक्त है इक्विटी के आधार पर भी इन्हें अब नहीं निकाल सकते। तो विरोधियों ने कहा हमे कोई आपत्ति नहीं इनसे। किन्तु हम 300 लोग है और 1000 से ज्यादा पद रिक्त हैं हमें नियुक्त कर दीजिए हमने प्रॉपर मैथ साइंस पढ़ा है जबकि प्रोफेशनल ने पेपर के रूप में गणित/विज्ञान विषय पढ़ा जबकि हमने विषय के रूप में पढ़ा है ।जज साहब ने इसे भी दलील को भी खारिज कर दिया।उन्होंने कहा नियमावली के अनुरूप ये सभी योग्यता रखते हैं कोई अवैध नहीं जिसे बाहर कर दें। आप लोगों को राहत भी नही दे सकते क्योंकि अवमानना कोर्ट को अधिकार नहीं। सिर्फ़ कोर्ट के आदेश का पालन करवाना है इस कोर्ट का कार्य ।इसके बाद ऐश्वर्या भाटी ने सरकार की तरफ बताया covid 19 की वजह से आदेश पालन करने में देरी हुई जिसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं। कोर्ट के आदेश के बाद हमने पूरे डिटेल में प्रत्येक अभ्यर्थियों की स्नातक उपाधी में गणित/विज्ञान चेक किया है।सभी योग्य हैं कोई भी ऐसा नहीं है जिसने गणित/विज्ञान न पढ़ा हो।उसके बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर दी। ये आज की कोर्ट की कार्यवाही थी।सभी लोग अब निश्चित होकर आज से नौकरी करें अब कोई परेशान न करेगा।। अनिल राजभर।

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