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वित्त एवं लेखाधिकारी,बेसिक शिक्षा,कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं का बोलबाला

 अयोध्या- जनपद के वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) कार्यालय में बहुतेरी वित्तीय अनियमितताओं का बोलबाला व्याप्त है।जनपद में कार्यरत शिक्षकों के वित्तीय देयकों की समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।वर्तमान में कार्यरत वित्त एवं लेखाधिकारी की उदासीन कार्यशैली व कार्यालय में कार्यरत पटल सहायकों की लापरवाह कार्यशैली व अकर्मण्यता के कारण शिक्षकों के वित्तीय समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।वित्त एवं लेखाधिकारी का अपने कार्यालय अधीन पटल सहायकों पर कोई

नियंत्रण नहीं है,जिसके कारण पटल सहायक अपनी मनमानी करते हुए,धन उगाही व वित्तीय शोषण की संभावना तलाशने में ही लगे रहते हैं।जहां धनादोहन की संभावना दिखती है,वह कार्य संपादित कर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं, जहां संभावना नहीं दिखती,उस कार्य को पूरा न कर लटकाये रहते हैं।इनकी कार्यशैली व मनमानी के चंद उदाहरण निम्न हैं-

1-जनपद में कार्यरत शिक्षकों से उनके वेतन से वर्तमान वित्तीय सत्र में अग्रिम आयकर कटौती के रुप में काटी गयी धनराशि ससमय आयकर विभाग में नहीं प्रेषित की गयी है।अब तक की गयी 11 माह की कटौती के सापेक्ष मात्र 6 माह की कटौती धनराशि ही आयकर विभाग में प्रेषित की गयी है।जो टीडीएस नियमावली का घोर उल्लंघन है।


2- शिक्षकों को प्रदत्त चयन वेतनमान के अंतर अवशेष भुगतान को भी कभी भी ससमय शिक्षकों के खातों में नहीं प्रेषित किया जाता।लापरवाही का आलम तो यहां तक है कि 3 माह से लेकर 2 साल पूर्व तक के अंतर अवशेष भुगतान अद्यतन नहीं किये गये हैं।हालात यहां तक खराब हैं कि कार्यालय स्तर से मानवसंपदा पोर्टल पर अवशेष भुगतान किये जाने की झूठी रिपोर्ट तक लगा दी जाती है,जबकि उक्त धनराशि महीनों बाद भी शिक्षकों के खातों में नहीं पहुंचती।मानवसंपदा पोर्टल पर आवेदन किये गये एरियर स्टेटस पर पेंडिंग,फारवर्डेड,अप्रूव्ड, अप्रूव्ड बट नाट पेड रिमार्क्स की भरमार दिखाई देती है।

3- विगत कई वर्षों से शिक्षकों के वेतन मंहगाई भत्तों की वृद्धि की किश्तों की धनराशि से एनपीएस कटौती के रुप में की गई 10% कटौती धनराशि को वर्षों बाद भी शिक्षकों के एनपीएस प्रान खातों में नहीं अपडेट कराया गया है।

4- जनपद के विभिन्न ब्लाकों में कार्यरत शिक्षकों के मंहगाई भत्तों के अवशेष भुगतान में भी भेद-भाव किया जाता है।जनपद के रुदौली ब्लाक सहित कतिपय ब्लाकों के मंहगाई भत्तों के अवशेष का भुगतान अद्यतन उनके न तो खातों में किया गया है,न जीपीएफ धारी शिक्षकों के जीपीएफ खातों में ही कराया गया है।जबकि अन्य ब्लाकों में भुगतान किया जा चुका है।

उक्त उदाहरण तो मात्र चंद उदाहरण ही हैं,ऐसे वित्तीय अनियमितताओं के सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं।वर्तमान में व्याप्त शिक्षकों के अवशेष देयकों से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं,घोटालों,अवैध धन उगाही की प्रवृत्ति व वित्तीय भ्रष्टाचार पर जनपद में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर विरोध कर रहे संगठन यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा),अयोध्या ने गहरा आक्रोश व कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।यूटा,अयोध्या के मंडल अध्यक्ष,बलबीर सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वर्तमान वित्तीय सत्र की समाप्ति से पूर्व,बजट सरेंडर करने से पूर्व जनपद में कार्यरत सभी शिक्षकों के बकाया सभी अवशेष देयकों का भुगतान नहीं किया जाता,तो उनका संगठन उत्तर प्रदेश शासन में उच्च स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराने को बाध्य होगा।

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