नई दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कॉलेज में अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ लेने के लिए परीक्षा से ठीक पहले उच्च जाति के छात्रों द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने को ‘नए किस्म की धोखाधड़ी’ बताया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने हरियाणा के मुख्य सचिव से पूछा कि जिस छात्र ने 2025 की परीक्षा में खुद को सामान्य श्रेणी से बताया था, उसे बौद्ध (अल्पसंख्यक) बनने की मंजूरी कैसे दी जा सकती है? यदि नहीं तो एसडीओ ने यह प्रमाण किस आधार पर जारी किया? कोर्ट ने हरियाणा सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही कोर्ट ने निखिल कुमार पूनिया एवं अन्य की याचिका खारिज कर दी।


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