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तीसरे समायोजन का सच: कागज़ी छात्र-शिक्षक अनुपात, सहमति का ट्रैप और जिले स्तर पर संघर्ष की जरूरत: हिमांशु

साथियों नमस्कार ,

तीसरा समायोजन जो कि पहले और दूसरे समायोजन से उत्पन्न हुई समस्या है और तब से ही आपको सचेत कर रहा था कि consent न दीजिए ये मात्र एक trap है क्योंकि वर्तमान में विभाग आपके लिए नहीं केवल छात्र शिक्षक अनुपात के विषय में सोचता है जो कि केन्द्रित तरीक़े से लखनऊ में बैठकर NIC के computer से कभी ठीक नहीं हो सकता था , तब भी कहा था अब भी कह रहा हूँ ये जिला लेवल का पद है और जिले में ही छात्र शिक्षक अनुपात सही किया जा सकता था जिसको इन्होंने जब पहले और दूसरे समायोजन में हुई गलतियों से सीखा और उसको स्वयं ठीक करने के बजाए तीसरे समायोजन का शिगूफा ले आए और ये अभी यहीं नहीं रुकेगा थोड़े समय बाद ये फिर होगा जिसमें मुख्यतः समस्या आएगी उच्च प्राथमिक के विषयों की । बाक़ी छात्र शिक्षक अनुपात की हकीकत भी ये है कि केवल कागजों में ठीक करना चाहते हैं जिनमे ये शिक्षा मित्र और अनुदेशकों को भी गिनते हैं जो कि नियम विरुद्ध है ।

पहले और दूसरे समायोजन में जो कि स्वैच्छिक था जिसमे ये RULE 21 को base बनाकर आपसे consent के रूप में फॉर्म भरवाया और फिर आपसे विद्यालय का पूछा तक नहीं और जबरदस्ती कर दिया , इसमें केवल लाभ उठाये नेतागण जो कि पर्ची आपसे कटवाते हैं और तीसरे में suffer कर रहा है आम शिक्षक जो कि केवल टकटकी लगाये देख रहा है कि उसकी कोई मदद करे ।

आप सभी शिक्षक संगठित होकर जिले लेवल पर इसका विरोध कीजिये, हम भी आज कई अधिवक्ताओं से मिलकर इस पर चर्चा हुई और यही निकलकर सामने आया कि इसमें जो भी शिक्षक (कनिष्ठ या वरिष्ठ) प्रभावित हो रहे हैं वे जिले लेवल पर टीम बनाइए और जिले की सूची को चुनौती दीजिए । हम दुर्गेश, आवेश और गणेश भाई आज इसी कार्य को लेकर कोर्ट में भी रहे बाकी हम अपनी पुरानी याचिकाओं के लिए भी सजग हैं जिन पर कार्य शुरू कर दिया है ।

संगठित रहिए , सहयोगात्मक रवैया अपनाइए और मजबूती से एकजुट होकर लड़ाई लड़िए हम आपके साथ हैं बस किसी के साथ अन्याय न होने पाये ।

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