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सरकार के पास विशेष परिस्थितियों में आदेश पारित करने की शक्ति: हाईकोर्ट

सरकार के पास विशेष परिस्थितियों में आदेश पारित करने की शक्ति: हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित भर्ती नियमावली-1974 का उद्देश्य कर्मचारी के परिवार के संकट में बचाना है। नियमों की व्याख्या ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे वास्तविक रूप से पीड़ित और निर्भरित परिवार लाभ से वंचित रह जाए। राज्य सरकार के पास इस प्रावधान के नियम-10 के तहत विशेष परिस्थितियों व लोकहित में आदेश पारित करने की शक्ति है।



यह टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी और न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने अनाथ बच्ची से जुड़े दया नियुक्ति मामले में सरकार को विचार करने का निर्देश देते हुए की।

शैलेन्द्र कुमार भारती बलिया के जोगीगंज प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सात जून 2018 को सड़क हादसे में उनकी सेवा के दौरान मौत हो गई थी। 10 जुलाई 2018 को पत्नी का भी निधन हो गया। इससे उनकी छह साल की बेटी अनाथ हो गई।

मामले में बच्ची के अपर जिला जज ने तीन मार्च 2021 को बच्ची की चाची राजकुमारी को विधिक संरक्षक नियुक्त किया। उन्होंने मृतक आश्रित के रूप में दया नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे बलिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खारिज कर दिया। कहा, वह 1974 के नियमों में परिभाषित परिवार की श्रेणी में नहीं आती हैं। मामला हाईकोर्ट गया तो एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। फिर याची ने खंडपीठ के पास सुनवाई की गुहार लगाई।

कोर्ट ने कहा— सरकार मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाए। कोर्ट ने कहा कि बच्ची नौ साल की है। उसके पास चाचा-चाची के अतिरिक्त कोई सहारा नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाए। साथ ही अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि राज्य सरकार को लिखित निर्देश प्राप्त कर एक सप्ताह में मेरिट के आधार पर उचित आदेश पारित कराया जाए। 27 फरवरी को फिर मामले की सुनवाई होगी।

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