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शिक्षा राज्य मंत्री के बयान पर बिफरे शिक्षकों से पुलिस की धक्कामुक्की, RTE से पूर्व के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने का विरोध

शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता संबंधी संसद में दिए उत्तर से आक्रोशित शिक्षकों ने बुधवार को सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में जयंत चौधरी के पुतले को दहन का प्रयास किया लेकिन पुलिसकर्मियों ने पुतला जलाने का मौका नहीं दिया।


जयंत चौधरी मुर्दाबाद, काला कानून वापस लो जैसे नारे लगा रहे शिक्षकों से नोकझोंक और धक्का-मुक्की के दौरान पुलिसकर्मी पुतला छीनकर वहां से चले गए। इसके बाद शिक्षकों ने संसद में दिए उत्तर की प्रतियां जलाकर आक्रोश जताया। शिक्षिकाओं की अधिक संख्या होने के कारण महिला पुलिसकर्मी भी मौके पर तैनात रहीं। सड़क किनारे प्रदर्शन कर रहे दर्जनों शिक्षक सुभाष चौराहे के बीच में पहुंच गए, जिससे चारों ओर जाम की स्थिति पैदा हो गई थी। जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की नीतियों से बेसिक शिक्षा विभाग को बहुत नुकसान हो रहा है। सरकार को कानून में परिर्वतन करते हुए आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए। जिलामंत्री शिव बहादुर सिंह ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। टीईटी से मुक्ति नहीं मिली तो संगठन बड़े स्तर पर आरपार की लड़ाई के लिए बाध्य होगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। प्रदर्शन में मनीष कुमार तिवारी, सुनीता तिवारी, सैयद बहार आलम, मसूद अहमद, राजेन्द्र कुमार कन्नौजिया, अरूण कुमार श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, नागेन्द्र प्रताप सिंह, मो. हसीब अहमद सिद्दकी, हरित जदली, अमर कुमार सिंह, राजेन्द्र कुशवाहा, कृष्ण कान्त कुशवाहा, प्रेम चन्द्र पटेल, मुचकुन्द मिश्र, राजेश कुमार यादव, राधेकृष्ण, बालेन्द्र पांडेय, रवि शंकर द्विवेदी, सुधाकर द्विवेदी, अतीक अहमद, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, सरोज कुमार सिंह, महेन्द्र सिंह, सूबेदार सिंह आदि शामिल रहे।

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