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देश के शिक्षकों के लिए न्याय और सम्मान की पुकार, TET की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर



सम्माननीय साथियों,

देश भर के लाखों सेवारत शिक्षक, जिन्होंने दशकों तक अपनी पूरी निष्ठा, समर्पण और मेहनत से शिक्षा के यज्ञ में आहुति दी है, आज अपनी आजीविका, सम्मान और सेवा सुरक्षा पर गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

*सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर 2025 का ऐतिहासिक आदेश*

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 1 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश में NCTE द्वारा 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को प्रदान की गई *TET छूट* को मात्र *दो वर्ष* (सितंबर 2027 तक) तक सीमित कर दिया है।

इस आदेश के परिणामस्वरूप:

- जिन शिक्षकों की सेवा में *5 वर्ष से अधिक अवधि शेष* है, उन्हें 2027 तक TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो गया है।

- असफल रहने पर *सेवा समाप्ति* अथवा *अनिवार्य सेवानिवृत्ति* का खतरा मंडराने लगा है।

- यह फैसला उन शिक्षकों की पीठ पर करारा प्रहार है, जिन्होंने RTE एक्ट 2009 लागू होने से पहले नियुक्ति प्राप्त की और वर्षों से बिना किसी शिकायत के कर्तव्यनिष्ठा से कार्य किया।

*RTE संशोधन 2017 और NCTE अधिसूचना 2010 का संदर्भ*

RTE अधिनियम 2009 में 2017 के संशोधन के बावजूद, NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से *छूट* प्रदान की गई थी। यह छूट स्थायी प्रकृति की थी, किंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्थायी मानते हुए मात्र दो वर्ष की समय-सीमा थोप दी। यह छूट छीनना न केवल लाखों शिक्षकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और अनुभवी शिक्षकों के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

*अब समय है एकजुट संघर्ष का*

यह स्पष्ट है कि केवल अदालतों के दरवाजे पर ही नहीं, बल्कि *सड़क से संसद तक* *न्यायपालिका से कार्यपालिका तक* एकजुट, सशक्त और निरंतर संघर्ष के माध्यम से ही इस अन्याय को दूर किया जा सकता है।

हमारी मांगें स्पष्ट और न्यायसंगत हैं:

1. *NCTE अधिसूचना 23 अगस्त 2010* में दी गई TET छूट को *पुनः स्थायी* रूप से बहाल किया जाए।

2. सितंबर 2027 की कृत्रिम समय-सीमा को *पूर्णतः समाप्त* किया जाए।

3. 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों को *TET की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति* प्रदान की जाए।

4. शिक्षकों की *सेवा सुरक्षा* को संवैधानिक संरक्षण दिया जाए, क्योंकि शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) तभी सार्थक होगा जब शिक्षक स्वयं सुरक्षित और सम्मानित हों।

*एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है*

जब तक हम बिखरे हुए हैं, तब तक अन्याय हमें कुचलता रहेगा।

जब हम एक होंगे — एक स्वर में, एक संकल्प के साथ — तो यह अन्यायपूर्ण बंधन टूटकर चूर-चूर हो जाएगा।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें:

*"हम अपनी सेवा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।"*

*शिक्षक एकता जिंदाबाद!*

*शिक्षकों का न्याय होगा!*

*समादर की भावनाओ सहित*

_विनय पांडेय "जिला अध्यक्ष"_

_सत्य प्रकाश वर्मा "जिला मंत्री"_

_वीरेंद्र प्रताप सिंह "जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष"_

_अंकित श्रीवास्तव "जिला संयुक्त मंत्री"_

_सुनील दत्त शुक्ला "जिला कोषाध्यक्ष"_

_हरीश कुमार "जिला उपाध्यक्ष"_

_*उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ श्रावस्ती*_

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